हमारे बारे में
अकादमी के बारे में
कम्मा कुल ने जो राह तय की — और वह सेवा जिसे हम आज आगे बढ़ा रहे हैं।
हमारी कहानी
कम्मा कुल ने जो राह तय की
हमारे पूर्वज फूलों भरी राहों पर चलकर महलों में रहने वाले लोग नहीं थे; वे आग की नदी को तैरकर पार करके आए और हमारे लिए समृद्ध जीवन गढ़ गए।
समय बीता, राजाओं का शासन समाप्त हुआ, और उसके बाद स्वतंत्रता संग्राम के दौर में भी हमारे पूर्वज अनेक बलिदान देने वाले त्यागी वीरों के रूप में उभरे।
प्रशासक, वकील, डॉक्टर, किसान — इस तरह विविधताओं से भरे समाज के रूप में कम्मवार समाज आज जी रहा है। भक्ति में श्रेष्ठ सज्जनों के रूप में, उदार दानवीरों के रूप में और कठोर परिश्रमियों के रूप में हम जीवन जी रहे हैं।
हमारे अतीत के पदचिह्न
मदुरै की रक्षा का इतिहास
चौदहवीं शताब्दी की वे घटनाएँ जो हमारे पूर्वजों को तमिलनाडु लेकर आईं।
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1311
मंदिरों की लूट
अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति मलिक काफ़ूर ने 1311 के मार्च–अप्रैल में चिदंबरम के नटराज मंदिर, श्रीरंगम के रंगनाथस्वामी मंदिर और उसके बाद मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरों को लूटा, और टनों के हिसाब से बहुमूल्य सोने, हीरे और रत्नों के आभूषण तथा हज़ारों घोड़े और हाथी लूटकर ले गया।
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1323
एक और आक्रमण
इस तरह धन लूटकर मलिक काफ़ूर के लौटने के बाद, 1323 में तुग़लक़ वंश का मुहम्मद बिन तुग़लक़ फिर से आक्रमण करने आया।
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1378
मदुरै की मुक्ति
विजयनगर साम्राज्य के युवराज कुमार कंपण्ण ने ई. सन् 1378 में मदुरै पर चढ़ाई की, सल्तनत की सेनाओं को खदेड़ दिया और उनके अत्याचारी शासन का अंत कर दिया।
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मधुरा विजयम्
राजकुमारी गंगादेवी का लेखन
विजयनगर के युवराज की पत्नी गंगादेवी अनेक भाषाएँ पढ़ने, लिखने और बोलने वाली बहुभाषी विदुषी थीं। उन्होंने इस ऐतिहासिक घटना को "मधुरा विजयम्" नाम से संस्कृत में लिखा। उल्लेखनीय है कि यह ग्रंथ आज भी पढ़ा जाता है।
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कम्मवार नायडू
हम कौन हैं
विजयनगर के युवराज कुमार कंपण्ण के साथ मदुरै की रक्षा करने आए सेनापतियों सहित सभी प्रशासक ही आज "कम्मवार नायडू" के नाम से पहचाने जाते हैं। इसके अलावा, तेलुगु बोलने वाले अन्य सभी समुदाय भी युवराज कुमार कंपण्ण के साथ आकर बसे और सल्तनत के विरुद्ध लड़े।
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पुनर्निर्माण
फिर से खड़े हुए मंदिर
सल्तनत द्वारा धराशायी किए गए सभी मंदिरों का भव्य पुनर्निर्माण किया गया और उन्हें फिर से पूजा के लिए तैयार किया गया। मंदिरों के प्रबंधन और देव-पूजा के लिए सैकड़ों एकड़ भूमि दान में दी गई। मंदिर केवल पूजा-स्थल ही नहीं, बल्कि प्रशासन का अंग और युद्ध व संकट के समय लोगों का आश्रय भी बने। तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों के मुख्य उत्सवों को भव्य रूप दिया गया; उनमें सबसे प्रसिद्ध है मदुरै का चित्तिरै उत्सव।
यदि उस समय आंध्र से आकर कुमार कंपण्ण तमिलनाडु की रक्षा न करते, तो मदुरै के आगे के सभी मंदिर लूट लिए जाते। यदि सल्तनत के लुटेरों को मदुरै में परास्त कर उत्तर की ओर न खदेड़ा जाता, तो तिरुनेलवेली के नेल्लैयप्पर मंदिर सहित अनेक मंदिर नष्ट हो जाते, और उसके बाद तिरुवनंतपुरम का अनंत पद्मनाभस्वामी मंदिर भी लूट लिया जाता।
हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि उस महासंकट से तमिलनाडु की रक्षा करने वाले वीर तेलुगु थे।
हमारा मार्गदर्शन
हमारा विश्वास और हमारा आदर्श
हमारा विश्वास
हमारा पूर्ण विश्वास है कि हमारे समाज की उन्नति का एकमात्र मार्ग आध्यात्मिकता और उस पर आधारित जीवन-शैली ही है।
“सभी बालिकाएँ देवी का स्वरूप हैं; सभी बालक राम हैं।”
इसी उच्च आदर्श की ओर कम्मवार कल्चरल अकादमी निष्ठापूर्वक कार्य कर रही है।
हमारा कार्य
कम्मवार कल्चरल अकादमी के उद्देश्य
मंदिर-दर-मंदिर, परिवार-दर-परिवार — हमारा कार्य।
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कुलदेवता मंदिर
हम तमिलनाडु के कुलदेवता मंदिरों में जाकर वहाँ के प्रबंधकों से परामर्श करते हैं और उनमें से एक को कम्मवार कल्चरल अकादमी चैरिटेबल ट्रस्ट का सदस्य बनाते हैं।
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परिवारों का विवरण
उस सदस्य से जुड़े कुलदेवता मंदिर के परिवारों का विवरण — हर परिवार में कितने लड़के, कितनी लड़कियाँ, उनमें से कौन हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी या कॉलेज में पढ़ रहा है, और उनकी आयु — ये सभी आँकड़े हम एकत्र करते हैं।
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महा संकल्प
इन बच्चों के लिए मंदिरों में "महा संकल्प" कार्यक्रम आयोजित कर हम पारिवारिक एकता और कम्मा कुल की श्रेष्ठ जीवन-शैली पर बल देते हैं।
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सरकारी परीक्षाएँ
अधिकारपूर्ण सरकारी पदों पर हमारे समाज के बच्चे भागीदार बनें, इसके लिए UPSC, TNPSC सहित सभी सरकारी परीक्षाओं में भाग लेकर सफल होने हेतु हम छात्र-छात्राओं को हर प्रकार से प्रोत्साहन देते हैं और आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराते हैं।
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भक्ति कार्यक्रम
हम आण्डाल तिरुप्पावै सम्मेलन और विष्णु सहस्रनाम पारायण जैसे भक्ति कार्यक्रम निरंतर आयोजित करते हैं।